- डेस्क टीम
Nana Patekar Death : 75 वर्षीय अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। उन्हें गोवा स्थित उनके आवास पर अचेत पाए जाने के बाद अस्पताल ले जाया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्हें बचाने की चिकित्सकीय कोशिश की गई, लेकिन वे नहीं बच सके। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने निधन की पुष्टि की है।
नाना पाटेकर की पहचान केवल हिंदी फिल्मों के अभिनेता के रूप में नहीं थी। उन्होंने मराठी और हिंदी सिनेमा के साथ रंगमंच में भी अपनी अलग पहचान बनाई। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘अग्निसाक्षी’ के लिए उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
उनकी दूसरी महत्वपूर्ण विरासत NAAM Foundation है, जिसे उन्होंने मकरंद अनासपुरे के साथ 2015 में शुरू किया था। संस्था का काम किसान परिवारों, जल संरक्षण, ग्रामीण विकास और सूखा प्रभावित क्षेत्रों पर केंद्रित रहा है।
नाना पाटेकर का निधन, भारतीय सिनेमा ने खोया एक विशिष्ट अभिनेता
भारतीय सिनेमा के चर्चित अभिनेता नाना पाटेकर अब नहीं रहे। 8 अक्टूबर की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर उन्हें अचेत पाए जाने के बाद अस्पताल ले जाया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्हें गंभीर cardiac arrest हुआ था। अस्पताल से जुड़ी चिकित्सकीय जानकारी में बताया गया कि उन्हें बचाने के लिए CPR दिया गया, लेकिन उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने भी निधन की पुष्टि की है।
लेकिन नाना पाटेकर की कहानी केवल उनके निधन की खबर तक सीमित नहीं है। करीब पांच दशक के करियर में उन्होंने ऐसे किरदार निभाए जिनमें अभिनेता की मौजूदगी अक्सर कहानी से भी बड़ी दिखाई दी। उनकी आवाज, संवाद-अदायगी और चेहरे के भाव उनकी विशिष्ट अभिनय शैली की पहचान बने।
‘परिंदा’ से ‘क्रांतिवीर’ तक राष्ट्रीय पहचान
नाना पाटेकर को पहली बार ‘परिंदा’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके बाद ‘क्रांतिवीर’ में उनके अभिनय ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया। ‘अग्निसाक्षी’ के लिए उन्हें फिर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इस तरह उनके खाते में अभिनय के लिए तीन National Film Awards दर्ज हैं।
यही उनकी अभिनय यात्रा की खासियत थी—वे पारंपरिक अर्थों में केवल नायक की भूमिका तक सीमित नहीं रहे। गंभीर किरदार, नकारात्मक भूमिकाएं, सामाजिक संघर्ष से जुड़े पात्र और बाद के दौर में हास्य—उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदारों में अपनी जगह बनाई।
‘नटसम्राट’ से एक अलग पहचान
मराठी सिनेमा और रंगमंच से उनका संबंध उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। ‘नटसम्राट’ में उनका अभिनय विशेष रूप से चर्चित हुआ। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि उनकी कलात्मक पहचान केवल मुख्यधारा की हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं थी।
पद्मश्री सम्मान
सिनेमा और कला के क्षेत्र में योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया था। राष्ट्रपति की आधिकारिक पद्म पुरस्कार अधिसूचना में उनका नाम कला वर्ग में दर्ज है।
पर्दे के बाहर की विरासत
नाना पाटेकर को याद करने का एक महत्वपूर्ण तरीका यह भी है कि उनके सार्वजनिक जीवन का एक बड़ा हिस्सा कैमरे से बाहर था।
2015 में उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ NAAM Foundation की शुरुआत की। संस्था ने महाराष्ट्र में किसान संकट, सूखा, जल संकट और ग्रामीण समुदायों से जुड़े काम को केंद्र में रखा। इसकी परियोजनाओं में जल संरक्षण, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, किसान परिवारों की सहायता और ग्रामीण विकास शामिल रहे।
यानी उनकी विरासत के दो अलग लेकिन जुड़े हुए हिस्से दिखाई देते हैं—एक अभिनेता जिसने पात्रों को यादगार बनाया और दूसरा सार्वजनिक व्यक्तित्व जिसने किसानों तथा ग्रामीण समुदायों से जुड़े सवालों में सक्रिय भूमिका निभाई।
क्यों महत्वपूर्ण है?
नाना पाटेकर का निधन सिर्फ एक फिल्म स्टार के जाने की खबर नहीं है।
उनका करियर उस दौर की याद भी है जब अभिनेता की पहचान केवल बॉक्स ऑफिस से नहीं, बल्कि रंगमंच, पटकथा, चरित्र-अभिनय और सामाजिक सरोकार से भी बनती थी।
उनकी फिल्मों के किरदार अलग-अलग पीढ़ियों के दर्शकों तक पहुंचे, जबकि NAAM Foundation के जरिए उनका सार्वजनिक काम फिल्म उद्योग से बाहर भी दिखाई दिया।
Key Facts
| तथ्य | जानकारी |
|---|---|
| नाम | नाना पाटेकर |
| आयु | 75 वर्ष |
| निधन | 8 अक्टूबर 2026 |
| स्थान | गोवा |
| प्रमुख क्षेत्र | हिंदी व मराठी सिनेमा, रंगमंच |
| राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार | 3 |
| पद्मश्री | 2013 |
| चर्चित फिल्में | परिंदा, क्रांतिवीर, अग्निसाक्षी, अब तक छप्पन, वेलकम, नटसम्राट |
| सामाजिक पहल | NAAM Foundation |
| NAAM Foundation | 2015, मकरंद अनासपुरे के साथ |
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